Wednesday, April 15, 2026
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आग से उत्तर वन मण्डल के जंगल दहके,बरेठा में काबू पावर झंडा में हुई बेकाबू

आग से उत्तर वन मण्डल के जंगल दहके,बरेठा में काबू पावर झंडा में हुई बेकाबू

जंगल मे आग से सतपुड़ा – मेलघाट कॉरिडोर पर पड़ेगा असर

बैतूल । बढ़ती गर्मी के साथ उत्तर वन मण्डल की दो रेन्जो के जंगल आज दहक उठे बरेठा घाट के जंगल की आग और तो दोपहर में काबू पालिया गया था लेकिन पावर झंडा के जंगल की आग पर रात तक काबू नही पाया गया था ।
उत्तर वन मण्डल की बैतूल रेंज के बरेठा घाट में आज लगभग दो पहर में किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा जंगल मे आग लगा दी जिसके चलते बड़े पैमाने पर आग फैल गई और धुंआ हाइवे पर फैल गया जिससे बरेठा घाट में आवागमन अवरुद्ध हो गया ।खबर मिलते बेतुल रेंजर जेपी शुक्ला ओर उनकी पूरी टीम ने दो घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया । इस घटना के दौरान बरेठा घाट में लम्बा जाम भी लग गया था जिसे वनकर्मियों ओर शाहपुर पुलिस ने सुचारू करवाया ।
इसके अलावा शाहपुर रेंज के पावर झंडा ओर काला पानी क्षेत्र के जंगल मे भीषण आग फैल गई दोपहर से लगी यह आग की देर रात तक बुझाई नही जा सकी थी ।दरअसल पावर झंडा ओर काला पानी के जंगल मे लगी आग को बुझाने के सारे प्रयास बार बार बार फेल हो रहे है इसकी मुख्य वजह थी बांस ।
वनकर्मियों द्वारा एक तरफ आग बुझाई जाती थी जब तक दूसरे तरफ आग भड़क जाती थी । ग्रामीणो की माने तो बार आग सुलगने की वजह थी बॉस में आग लगना ओर बांस के नीचे गिरते ही जंगल मे फिर से आग लग जाना है ।ग्रामीणो एक आग के फैलने की एक दूसरी वजह भी बताई जंगल में आग फैलने की दूसरी वजह गिरे पड़े सूखे पेड़ जो की जगह पर ही पड़े पड़े सड़ जाते है ऐसे वक्त में वह भी आग पकड़ रहे है और इसे रोक पाना ही सबसे बड़ी चुनोती है ।

सतपुड़ा-मेलघाट कॉरिडोर में आग से बड़ा नुकसान

उत्तर वन मण्डल की बरेठा ओर शाहपुर के जंगलों में लगी भीषण आग जंगल में आग लगना (वनाग्नि) एक गंभीर प्राकृतिक और मानव-जनित आपदा है, जिससे पर्यावरण, जीव-जंतु और इंसानों—तीनों को भारी नुकसान होता है। इसके प्रमुख दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं,इस
आग से बड़े-बड़े पेड़, पौधे और जड़ी-बूटियाँ जलकर नष्ट हो जाते हैं। कई दुर्लभ और औषधीय प्रजातियाँ हमेशा के लिए खत्म हो सकती हैं।
वन्य जीव पक्षी, कीड़े-मकोड़े या तो जल जाते हैं या अपना आवास खो देते हैं। कई बार पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो जाता है।आग से निकलने वाला धुआँ वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसें फैलाता है, जिससे सांस की बीमारियाँ बढ़ती हैं। जलवायु परिवर्तन पर असर
जंगल कार्बन को अवशोषित करते हैं, लेकिन आग लगने पर वही कार्बन वातावरण में चला जाता है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है। आग से मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत जल जाती है, जिससे जमीन बंजर हो सकती है और खेती प्रभावित होती है।पेड़ों के नष्ट होने से वर्षा का संतुलन बिगड़ता है, जिससे सूखा या बाढ़ जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।अगर आग बस्तियों या सड़कों के पास फैल जाए तो घर, फसल, और जान-माल को नुकसान होता है, साथ ही आवागमन भी बाधित हो जाता है। आग लगने सेH
कई प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर पहुँच जाती हैं, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता है।

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