Saturday, March 21, 2026
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रामपुर भतोड़ी परियोजना के रिटायर पर्सन भी हुए डीएम का शिकार

रामपुर भतोड़ी परियोजना के रिटायर पर्सन भी हुए डीएम का शिकार

ऑफिस के कर्मचारी से लेकर मैदानी अमला कर चुका है प्रताड़ना की शिकायत

बैतूल । रामपुर भतोड़ी परियोजना के ऑफिस ओर मैदानी कर्मचारियों की प्रताड़ना के बाद अब रिटायर पर्सन के दो मामले सामने आए है ।दरअसल
जीवन भर जंगल की रक्षा में अपनी सेवा समर्पित करने वाले मैदानी अमले के दो कर्मचारी हाल ही में रिटायर हुए ।
रिटायरमेन्ट के बाद इन वन कर्मियों को उम्मीद थी कि बाकी बची ज़िंदगी पेंशन के सहारे आराम से कट जाएगी लेकिन उन्हें इस बात का एहसास नही था कि रिटायरमेंट के बाद अधिकारी उनके साथ इस तरह का व्यवहार कर उन्हें प्रताड़ित करेंगे ।
कालका न्यूज़ से दो वन कर्मचारियों ने सम्पर्क कर डीएम राम कुमार अवधिया द्वारा लगाए गए अड़ंगे ओर उससे होने वाली मानसिक प्रताड़ना की दास्तान मय दस्तावेज के सुनाई ।

प्रकरण क्रमांक 1 : रघुवर प्रसाद अहिरवार के मुताबिक मैं रामपुर भतोडी परियोजना मंडल बैतूल से सेवानिवृत्त हुआ हूं। मेरे उच्च पेंशन प्रकरण में त्रुटि सुधार हेतु आवेदन 15 दिवस पूर्व मय दस्तावेजों के जमा किया गया है। जिस पर संभागीय प्रबंधक के हस्ताक्षर कराया जाना है। परन्तु मेरे आवेदन पर साईन किये जाने से बार बार मना किया गया तथा आज दिनांक तक मेरे आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं हई। मेरे पत्रों पर बार-बार संभागीय प्रबंधक द्वारा अडंगा लगाया जाकर साईन नही किये जा रहे है। मुझे संभागीय प्रबंधक रामकुमार अवधिया द्वारा मंडल कार्यालय बुलाया गया। मैं कार्यालय पहंचा. संभागीय प्रबंधक से मिलने का प्रयास किया, परंतु वो मुझे नही मिले, और दोपहर कहीं चले गये। मैंने अगले दिन भी इंतेजार किया, परन्तु वो कार्यालय नही आये,मुझे एहसास हुआ कि वो मझे परेशान करना चाहते, लेकिन मुझे पता नही ।मुझ जैसे सेवानिवृत्त कर्मचारी को मानसिक एवं आर्थिक रूप से परेशान किया जारहा है ।

प्रकरण क्रमांक 2 : शिकायतकर्ता तरुण मालवीय जी द्वारा बताया गया है कि वन विकास निगम की भौरा रेंज में क्षेत्र रक्षक के पद पर पदस्थ रहा हूँ ।स की क्षेत्र रक्षक के पद से 2014 को रिटायर हुआ था ज्वाइनिंग 1994 की थी लेकिन तिथि 10/10/2008 हो गई है इस कारण पेंशन कम आ रही है आवेदन किया तो पेंशन बंद हो गई लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई जिससे परिवार चलाने में काफी समस्या आ रही है ।श्री अवधिया यदि कर्मचारियों के प्रति सहानभूति रखते तो महज 10 मिंट में समस्या का समाधान ही जाता लेकिन संभागीय डीएम रहते तो बैतूल के लेकिन आफिस में आकर सरकारी काम निपटाने में उन्हें पसीने आजाते है ।

यह दो प्रकरणों से यह बताने की कोशिश कर रहे है कि किस तरह अवधिया जैसे अधिकारी किस तरह कर्मचारियों को परेशान करते है ।

इस पूरे मामले में डीएम राम कुमार अवधिया का कहना था कि मैं खंडवा ओर बैतूल के प्रभार में हूँ लगातार मुख्यलय पर नही रहता हूँ ।आप मुझे प्रकरण भेज दे मैं उन्हें दिखवा लेता हूँ ।

 

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