दक्षिण वन मंडल में वाहनों पर डीज़ल घोटाले का पर्दाफाश, बिल-बाउचर से बड़ा खुलासा
सीसीएफ ने डीएफओ से जांच तलब की
बैतूल। दक्षिण वन मंडल में पीए और नाकेदारों द्वारा लगाए गए वाहनों के उपयोग को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। कालका न्यूज़ के हाथ ऐसे बिल-बाउचर लगे हैं, जिनसे वाहन संचालन में अनियमितता और अत्यधिक खर्च का खुलासा हुआ है। माना जा रहा है कि इन दस्तावेज़ों के आधार पर पूरा सिंडिकेट बेनकाब हो सकता है। कर्मचारियों की शिकायतों के बाद अब इस मामले से जुड़े राजस्व नुकसान की भरपाई की संभावना भी जताई जा रही है।
हर चार दिन में 45 से 52 लीटर तक डीज़ल की खपत
मिल रहे दस्तावेज़ों के अनुसार, वन विभाग में तैनात बोलेरो वाहनों में हर 4 दिन में 45, 50 और 52 लीटर तक डीज़ल डलवाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी सामान्य सरकारी वाहन के लिए इतनी अधिक खपत संदिग्ध मानी जाती है।अब इसका जवाब ढूँढा जा रहा है कि क्षेत्रीय अधिकारी और रेंज कर्मचारी यदि इतनी डीज़ल खपत दिखा रहे थे, तो मैदानी कार्य के वास्तविक परिणाम क्यों नहीं दिख रहे?
50 हजार रुपये मासिक खर्च, फिर भी परिणाम शून्य
सूत्रों का दावा है कि दक्षिण वन मंडल की सभी रेंजों में तैनात बोलेरो वाहनों पर प्रति माह लगभग 50,000 रुपये तक खर्च दिखाया जा रहा है। इसके बावजूद विभागीय कार्यों में कोई ठोस उपलब्धि नहीं दिखाई दे रही है।
खबर के अनुसार, ये वाहन बिना निविदा प्रक्रिया के पीए से लेकर नाकेदारों तक की सिफारिशों पर लगाए गए थे। आरोप है कि टेंडर इसलिए नहीं निकाला गया ताकि बाहरी लोगों को वास्तविक भुगतान की जानकारी न हो सके और पूरा लाभ कुछ कर्मचारियों तक सीमित रहे।
इनका कहना है ।
मेरे संज्ञान में आने के बाद मेरे द्वारा दक्षिण वन मण्डल के डीएफओ से पूरी रिपोर्ट मांगी गई है ,जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी कर्मचारी है उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी ।
बासु कनोजिया
CCF, बैतूल
