जेल जमीन मुद्दा : अफसरों के न्यायालय में उपस्थित होने से प्रशासन का पकड़ाया झूठ
– १२ जनवरी को कलेक्टर के हवाले से किए गए दावों की हवा निकली
बैतूल। लोक उपयोगी सेवाओं की स्थाई लोक अदालत में जेल की जमीन को लेकर लगाए गए परिवाद में अंतत: प्रशासन की ओर से नजूल अधिकारी मसूद अहमद और नपा की ओर से अधिवक्ता जयदीप रूनवाल ने जवाब प्रस्तुत किया है। शनिवार को न्यायालय में नजूल अधिकारी मसूद अहमद स्वंय उपस्थित हुए और परिवाद में पक्षकार बनाए गए मुख्य सचिव मप्र शासन, प्रमुख सचिव राजस्व और कलेक्टर बैतूल की ओर से जवाब प्रस्तुत किया है। शनिवार को जो जवाब प्रस्तुत किया गया है, उससे 12 जनवरी को कलेक्टर के हवाले से जो प्रकरण को लेकर दावे किए गए थे, उनकी पोल खुल गई है और वे झूठे साबित हो गए हैं। गौरतलब रहे कि इस मामले में सिविल सोसायटी की ओर से सुनील पलेरिया ने परिवाद लगाया था। इस परिवाद में २७ जुलाई २०२४ को न्यायालय ने नोटिस जारी किए थे। इसमें २८ अगस्त २०२४ को मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, कलेक्टर और सीएमओ को उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। उक्त चारों द्वारा लगातार इस नोटिस की अनदेखी की गई और जवाब प्रस्तुत ही नहीं किया गया जो अब २४ जनवरी २०२६ को जवाब प्रस्तुत किया गया। सुनील पलेरिया का कहना है कि इस प्रकरण को लेकर जनसंपर्क के माध्यम से १२ जनवरी को जो भी दावे किए गए थे वे पूरी तरह से झूठे साबित हुए हैं और प्रशासन को जवाब प्रस्तुत करना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस जवाब में नजूल अधिकारी बैतूल ने पक्षकार-१ मुख्य सचिव, पक्षकार-२ प्रमुख सचिव राजस्व को प्रकरण में पक्षकार बनाए जाने को गैर जरूरी बताया है।
